Mera desh esa to nhi tha

                             दोहरी मानसिकता।   
 गर्व से कन्हू मैं हिंदू हूं
 जन्म से संस्कार से पहचान से लाखो साल लग गए हम सभ्य बनने में पर एक पल कुछ लोग हम नोच खाते हैं, 
 पहचाने तो वो कभी जाते नहीं फिर भी वो हमेशा झुंडो में आते हैं बात बुरी लगे तो पहले सोचना फिर अपना इतिहास पढ लेना जिन्होने  हम लुटा मारा या देश को बारबाद कर दिया ओर फिर भी इन नामुनो कुतो के नाम पर आज कल के भांड कलाकार अपनी बच्चे का नाम रखते हैं जिन्का अनुभव हम करते हैं
उन्हे स्टार या आइकन कहते हैं। आपको अपने देश में गद्दारो दुढने की जरूरत नहीं वो सब आपको मुक्ता में मिल जाएंगे

 हमारे देश ने के बटवारे देखे हैं, पर हम याद सिरफ पाक या बांग्लादेश है और अफगानिस्तान  बर्मा को क्यों भूल जाते हो। किस बात के लिए जाने शायद  इसी लिए तो
 हम बिना करन ही गांधी को राष्ट्र पिता बना चुके हैं
 जब की अंगरेजो के खिलाफ उन्होन कभी कोई आंदोलन पुरा किया ही नहीं..तो  फिर किस या कब उन वह राष्ट्रपित धोसित किया क्या अंगरेजो के वाकई उनसे ईतना डर लगता था सच ही कहा है
 किसी ने देश के गद्दारो को जूट मारो सालो को या मुझे  वो कहीं से भी देश भक्त नहीं लगता ये मेरी राय है
 किसी को कुछ सक है जाओ कुछ वीडियो लिंक दीये इंटरनेट पे है वो देख लो फिर जानेंगे क्यों मेरा यू सोचना 
आज कल तो उनसे भी कुछ शांतिप्रिय सज्जनों ने देश में बात बात लोगो को सेक्युलर बोलना या बन जाने का ज्ञान देना सुरु कर दिया है ,मेरी तरफ से वो चुल्हे में जाए सब, मुझे क्या वेसे भी जिन्ना पाकिस्तान ले गया तो आप क्या हैं
 जवाहरलाल ne अपनी ओलाद के लिए खुद को 15 में से एक वोट मिलने पर भी गांधी के सात मिली भागत कर खुद को प्रधान मंत्री धोसित कर दिया  जवाहरलाल नेहरू ने देश का पहला धोटाला केसे ओर  कब किया जानो
 वेसे भी जिसने देश को लुटा वो आज देशो भक्त बन गए हैं बाकी देश के अपने देश का कोणार्क मंदिर पता है, सूर्य मंदिर के बार में पढ़े थोढ़ासा
 ये क्या धोहरी मनसिकता नहीं हमारी कि हमारे पूर्वजों को मारने वाले को हम महान कहते हैं 
बाबर हो या अकबर सभी ने सिरफ देशो को लुटा ये हिंदुस्तान है परगना नहीं जो मे महान कन्हू ऐसे वेसे भी धन्य हैं मेरे देश की शिक्षा व्यवस्थ जो आज कल बच्चन को कुछ भी पढ़ा रही है
 
जिस्का विरोध से लोगो के साथ सरकार या बाकी सब कर रहे हैं हमारी सोच तो ऐसी है की कोरोना फेलाया किसी ने हैं हम नाम किस्का लेते हैं जेसे आज कल मुस्लिम नेता हमेे अपने ही देश रहने के नियम बताता रहे  या हम बेवकुफो की तरह रहना सिखा रहे हैं या हम आज भी अपने  उपर पत्थर खा रहे हैं  

मुझे भी आज कल ये सोच के दुख होता है की हमारे चुने हुए नेता देश तथा हमारे लिए कर क्या रहे हैं. 
 Aaj आज का दोर तो ये है की कोई शोभा यात्रा निकले से पुरा समाज खड़ा होके के पत्थर बरसाने लगता  है 

पुलिस नेता गण कानून पुरा समाज दर्शक बन देखता है में ठुकता हु ऐसे नाम्रदो पर जो ये तक भूल गए की हिंदू वीर हैं
 
अपना नहीं तो अपने धर्म का सोचो ओ अपनी ओलाद का सोचो जो जनता है आपको लडना आता है या आज नहीं तो कल आपको लडना ही हैं  जिस्की तयारी वो पहल कर चुके अब आप सेकुलर बनो या बहादुर ये आपको सोचना है 

आप आज भी अपनी सोच 1947 1964 1990 वाली रख कर हिंदू मुस्लिम भाई भाई बोलोगे जेसे हिंदी चीनी भाई कहके गलवान तक दे दिया  आधार कश्मीर वो ले चुके अब क्या पूरा भारत देखना चाहते हैं या धर्मनिरपेक्ष बने रहना चाहते हैं आपकी सुरक्षा आपकी सोच अब जागो इस धर्मनिरपेक्षता की दोहरी मानसिकता से जो हिंदुओ को जाति में बाट कर खुद को महान बनाता है पत्थर ओर बम चलते हैं फिर भी वो अपने को अल्पसख्यक कहते हैं अभी समय है जाने आपकी मनसिकता दोहरी है की नहीं वीर बने  तथा लडना सिखे
 *♦️युगांडा जन संहार 1972 पर प्रतिक्रिया  ही जानें♦️*

   युगांडा एक अफ्रीकी देश है जो केन्या के बगल में स्थित है। पूर्व में यह देश भारत की तरह  अंग्रेजों का गुलाम था। अंग्रेज बहुत सारे भारतीयो को युगांडा लेकर गये जो वहां बस गये। कुछ भारतीय वहां रोजगार धन्धे के लिए भी गये और वहीं बस गये। यहां की आबादी में 85% मुस्लिम, 14 % ईसाई थे।
             
            भारतवासियों ने वहाँ जाकर अपने पुरूषार्थ का पसीना बहाया जिसके फलस्वरूप वे वहाँ जाकर समृद्ध बन गए। उद्योग -धंधे से लेकर राजनीति तक में भारतीयों का सिक्का चल पड़ा।

           ईदी अमीन नाम के एक मुस्लिम सैन्य अधिकारी ने 1971 में तख्ता पलटकर मिल्टन ओबेटो को हटा दिया और स्वयं युगांडा का प्रमुख बन गया।

            अपने शासन के एक साल बाद 1972 में, इसने गैर मुस्लिम भारतीयों को बाहर निकल जाने का फरमान सुनाया। इस फरमान के बाद भी जब प्रवासी भारतीय हिंदूओं ने युगांडा नहीं छोड़ा तो उसने अपने इस्लामिक सैनिकों को लूट-मार करने की खुली छूट दे दी।

            युगांडा के सेंट्रल और उत्तरी जोन में मुसलमान ज्यादा रहते हैं और इसी जोन में प्रवासी भारतीय भी ज्यादा रहते थे। ईदी अमीन की खुली छूट के कारण सेना के साथ-साथ मुसलमानों ने भी हिंदुओं को मारना-पीटना और लूटना शुरु कर दिया जिसके कारण अपने कठिन परिश्रम से अर्जित पीढ़ियों की समूची कमाई छोड़कर हिंदूओं को वहां से भागना पड़ा।

             सेना और मुस्लिम जनता ने मिलकर हिंदूओं की संपत्ति पर कब्जा कर लिया।

             सैकड़ों हिंदूओं को मार भी दिया गया। फिर भी 60000 लोग वहां से भागने में सफल रहे। 
          इनको वहां से सुरक्षित निकालने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

              इंदिरा गांधी तब देश की प्रधानमंत्री थी। युगांडा के हिंदूओं पर अत्याचार को देखकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मा० बालासाहेब देवरस जी ने इंदिरा गांधी से संयुक्त राष्ट्र में शिकायत करने की अपील की, किंतु हिन्दुओं के लिए इन्दिरा गांधी ने कोई कदम नहीं उठाया।

             तब संघ के सर संघचालक जी ने केन्या के हिंदू संगठनों को तार भेजकर भारत वंशियों को सहायता करने की अपील की।

             दरअसल केन्या युगांडा का पड़ोसी देश है और केन्या में 1947 के मकर संक्रांति के दिन संघ के स्वयंसेवकों ने ’भारतीय स्वयंसेवक संघ’ नामक संगठन का निर्माण किया था और यह बहुत जल्दी ही एक बड़ा संगठन बन गया था।

             खैर संकट की उस घड़ी में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के केन्या की अपनी शाखा (भारतीय स्वयंसेवक संघ) के स्वयंसेवकों ने युगांडा के हिंदुओं के पुनर्वास में तन-मन धन से सहायता की।

           यहाँ तक कि उन प्रवासी भारतीयों को ब्रिटेन और फिजी भेजने में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

             तब उनके इस कार्य पर अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया के दूतावासों ने ’भारतीय स्वयंसेवक संघ’ की प्रशंसा की थी।

             उन 60000 हिंदूओं में 29000 हिंदूओं ने ब्रिटेन में शरण ली तो 4500 फीजी गए, 5000 ने कनाडा में, 1200 लोगों ने केन्या में शरण ली तो 11000 लोग लौटकर भारत आए।

           शुरू में इंदिरा गांधी युगांडा से आए 11000 हिंदूओं पर मौन साधी रही। लेकिन जब अटल बिहारी वाजपेई व लालकृष्ण आडवाणी और समूचा संघ परिवार इस पर शोर मचाने लगा, तब जाकर इंदिरा गांधी  को इन्हें नागरिकता देनी पडी।

             यह बात जानना भी महत्वपूर्ण है कि जिन 29000 हिंदूओं ने ब्रिटेन में शरण ली थी उसके कारण वहाँ के समाचार पत्रों ने इसके लिए अपनी सरकार की कड़ी आलोचना करना शुरु कर दिया।

             ब्रिटेन के अखबारों की आलोचना इतनी कड़वी थी कि मजबूरन वहां के विदेश मंत्री को यह कहना पड़ा कि ’हम इनको ब्रिटेन में नहीं रखने जा रहे हैं। हम इन सभी को भारत भेजेगें।

           तब इस मुद्दे पर ब्रिटेन के अधिकारियों और भारत के अधिकारियों में बातचीत शुरू हुई। भारत टस से मस नहीं हुआ। उसके बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने इंदिरा गांधी से खुद बात की, किंतु इंदिरा गांधी ने 29000 भारतीयों को लेने से इंकार कर दिया।

             बाद में यू एनओ ने हस्तक्षेप किया कि ’यह अभी प्रताडऩा से पीड़ित हैं, इसलिए इनको तत्काल ब्रिटेन में ही रहने दिया जाए’। बाद में उनके अच्छे ब्यवहार के कारण सभी 29000 को ब्रिटेन की नागरिकता दे दी गई।

     *तब की कांग्रेस और इन्दिरा गांधी की उपेक्षा की वजह से युगांडा ने हिन्दुओं का उत्पीडन हुआ* और उन्हें भारत में  शरण नहीं दी गई। और वो शरणार्थी बनकर दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हुए।

            *सन 1971 में, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सरकार ने बंगलादेश से आए मुस्लिम घुसपैठियों के लिए नागरिकता बिल में संशोधन किया और सभी बंगलादेशी मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देकर उन्हें सारी सुविधाएं दी।*

 *कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता केवल हिन्दुओं को सुविधाएं देनें से खराब होती हैं, मुस्लिमों को देने से नहीं।* तभी तो आज जब मोदी सरकार दुनियां में सताए जा रहे हिन्दुओं को भारतीय नागरिकता देकर सहारा देना चाहती है, तब कैसे कांग्रेस ने नागरिक संशोधन बिल का विरोध किया, हम सबने व्यथित मन से देखा।

             समय है कि दुनिया के हिन्दू समझें कि उनकी चिन्ता करने वाला पूरी दुनिया में यदि कोई है, तो वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व भाजपा ही है, बाकी केवल वोट के भूखे हैं और देश को खोखला करने की मानसिकता पाले हुए हैं।

     *हमारे वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह जी ने सदन में 1972 में युगांडा के हिन्दुओं पर हुए जुल्मों का उल्लेख किया और दर्द की उस घड़ी में कांग्रेस ने हिंदुओं के साथ जो बर्ताव किया उसका जीवन्त वर्णन किया। आप सोचिये क्या इंदिरा केवल मुस्लिमों की प्रधानमंत्री थी ?? क्या इंदिरा को भारतीय हिंदुओं ने वोट नहीं दिया था*

 https://youtu.be/-L6V4xSyPWc
 

Comments

  1. Dohari mansikta ki Kami nahi yanha kod ko seculer bana desh ko mitane par tule hain

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